दर्जिनिया ताल: आदमी के साथ मगरमच्छ भी रहते हैं, देखने पहुंच रहे देसी-विदेशी पर्यटक

दर्जिनिया ताल: आदमी के साथ मगरमच्छ भी रहते हैं, देखने पहुंच रहे देसी-विदेशी पर्यटक
इंडो नेपाल न्यूज़ टीम पहुंची दर्जिनिया ताल, जाना हॉल, पर्यटकों ने सुरक्षा की किया मांग।
आई एन न्यूज टीम महराजगंज डेस्क:
पड़ोसी राष्ट्र नेपाल से निकली नारायणी नदी के तट एवं सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग अंतर्गत निचलौल रेंज के मनोरम वादियों के बीच स्थित दर्जिनिया ताल तेजी से विकसित हो रहा है।
दिन प्रतिदिन दर्जिनिया ताल को देखने वाले देसी विदेशी पर्यटकों की संख्या निरंतर बढ़ रही है।
रविवार को इंडो नेपाल न्यूज़ टीम भी दर्जिनिया ताल को देखने और उसके हकीकत को जानने समय करीब 3:00 बजे दर्जनिया ताल पहुंचा। मगरमच्छों के बसेरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में महिला पुरुष ताल के आस पास भ्रमण करते देखे गए।
चारो तरफ फैली हरियाली और नारायणी के लहरों के मधुर स्वरों के बीच जंगलों से घिरे एक ताल में अगर आपको एक साथ एक दो नहीं बल्कि दर्जनों मगरमच्छ दिख जाए, तो आपके यात्रा का आनंद शायद दोगुना हो जाएगा।
जिला मुख्यालय के अंतिम छोर पर बसा गांव भेडिहारी का कटान टोला जहां आदमी के साथ मगरमच्छ भी रहते हैं। चारों ओर से जंगलों से घिरे इस गांव से सटे एक ताल में करीब 400 से अधिक मगरमच्छ रहते हैं। जिसे सुबह शाम आसानी से देखा जा सकता है। ताल में निर्मित टीलों पर अपने बच्चों के साथ खेलते व झुंडों में मगरमच्छ लुभावने लगते हैं।
बताया गया है की जब मगरमच्छ अपने शिकार के लिए टीलों से पानी मे छलांग लगाते हैं, तो नजारा देखते ही बनता है। इसके अलावा ताल से थोड़ी दूरी पर बहने वाली नारायणी गंडक नदी, जिसमे डॉलफिन (गंगा चीता) व घड़ियाल भी देखे जा सकते हैं। वहीं निकट में नारायणी नदी है। जिसमें वन विभाग ने घड़ियालों के संरक्षण के लिए बीते वर्ष लखनऊ कुकरैल प्रजनन केंद्र से 42 मादा व 13 नर सहित 55 घड़ियालों को लाकर छोड़ा था।
बताया गया है की पांच हेक्टेयर क्षेत्रफल में दर्जिनिया ताल में फैला हुआ है। यहां मगरमच्छों के लिए अनुकूल आबोहवा है। प्रत्येक वर्ष इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। पिछले वर्ष हुई गणना में इनकी संख्या साढ़े तीन सौ थी।
जबकि इस वर्ष इनकी संख्या बढ़कर करीब चार सौ के पास पहुंच गई है।
बीते एक वर्ष में करीब 70 हजार पर्यटकों ने मनोरम वादियों के बीच स्थित दर्जिनिया ताल पर पहुंचकर मगरमच्छों को देखकर लुप्त उठाया है। इतना सब कुछ होने के बाद भी यहां सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है।
पर्यटक शाम शाम का मनोरम दृश्य देखने के लिए वहां रुकना चाहते हैं । किंतु सुरक्षा के अभाव के कारण शाम होने से पहले ही पर्यटक भागना शुरू कर देते हैं। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है, कि देसी विदेशी पर्यटक ताल पर कुछ ही घंटे व्यतीत कर पाते हैं । वह भी वह सहमे रहते है।
कुशीनगर, गोरखपुर तथा सोनौली से गए तमाम परिवारों ने कहां की यहां सुरक्षा की व्यवस्था होनी चाहिए,लेकिन एैसा नहीं है। सुरक्षा व्यवस्था रहता तो हम सभी और देर तक यहां रुकते।
महाराजगंज उत्तर प्रदेश।