बौद्ध संस्कृति ही नहीं,बल्कि सनातन संस्कृति के लिए भी ख्याति प्राप्त है कुशीनगर

बौद्ध संस्कृति ही नहीं,बल्कि सनातन संस्कृति के लिए भी ख्याति प्राप्त है कुशीनगर
आई एन न्यूज डेस्क: कुशीनगर भगवान बुद्ध का महापरिनिर्वाण स्थल है और बौद्ध समुदाय के लोगों की आस्था का अहम स्थल है। यह स्थल सिर्फ बौद्ध संस्कृति व सभ्यता के लिए ही नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की पहचान के लिए भी ख्याति प्राप्त है। यहां सिर्फ बौद्ध मंदिर ही नहीं बल्कि शिव व श्रीराम जानकी मंदिर भी आकर्षण का केंद्र हैं, लेकिन इनमें थाई मंदिर सनातन संस्कृति व सभ्यता को समेटे हुए है। वहीं थाई वास्तुकला व नक्काशीदारी का अद्भुत व विलक्षण नमूना भी है। यहां तथागत बुद्ध के साथ त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु व महेश) पूजे जाते हैं। अनीश्वरवादी बुद्ध के साथ सनातन धर्म के त्रिदेव की पूजा कहीं और नहीं होती है। यहां दो संस्कृतियों के मेल का अनूठा संगम पिछले कई सालों से झलकता है। बौद्ध और सनातन संस्कृति के मिलाप के इस अनूठे संगम में वाट थाई मंदिर परिसर में तथागत भगवान बुद्ध के साथ ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश की मूर्तियां स्थापित हैं। इसके अलावा मंदिर में शिव-पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय व त्रिशूल के अलावा हाथ में चक्र लिए भगवान विष्णु, लक्ष्मी, ब्रह्म व मां सरस्वती के भित्ति चित्र आकर्षण के केंद्र हैं। वहीं गरुड़ पक्षी को भी मंदिर में प्रमुख स्थान दिया गया है। जिसके कारण बौद्ध संस्कृति ही नहीं,बल्कि सनातन संस्कृति के लिए भी ख्याति प्राप्त है कुशीनगर। विभिन्न देशों से भारत में आने वाले बौद्ध एक बार कुशीनगर का परिक्रमा अवश्य करना चाहते हैं।
कुशीनगर- उत्तर प्रदेश।